मुश्किल हालात
जानवर जंगल के माहौल में हमेशा अपने दुश्मनों के ख़तरे में रहते हैं। इस वजह से वे हर वक़्त चौकन्ने रहते हैं। यह चौकन्नापन उनके लिए बहुत ज़रूरी है। इससे उनकी छुपी हुई क़ाबिलियतें बाहर आती हैं और उनकी पहचान ख़त्म नहीं होती। यही वजह है कि जो बड़े-बड़े पार्क जानवरों के लिए बनाए जाते हैं, उनमें जानबूझकर उनके लिए ख़तरे पैदा किए जाते हैं। मिसाल के तौर पर, खरगोशों के पार्क में एक बिल्ली छोड़ दी जाती है या हिरनों के पार्क में एक शेर या भेड़िया डाल दिया जाता है। इस तरह जानवरों की सतर्कता बनी रहती है। वे अपनी सुरक्षा के लिए हर वक़्त ज़िंदादिल और सक्रिय रहते हैं। अगर ऐसा न हो, तो धीरे-धीरे वे सुस्त और बेजान हो जाएँगे।
यही बात इंसानों पर भी लागू होती है। इंसान के अंदर अनगिनत क्षमताएँ छुपी होती हैं। ये क्षमताएँ आम हालात में सोई रहती हैं। वे तब जागती हैं, जब उन्हें झटका लगे, जब उन्हें इस्तेमाल में लाया जाए। किसी भी जगह यह देखा जा सकता है कि जिन परिवारों में आराम और सुविधा आ जाती है, उनके लोग संवेदनहीन और कम समझदार हो जाते हैं। इसके उलट जिन परिवारों को मुश्किल हालात ने घेर रखा हो, उनके लोगों में हर तरह की मानसिक और व्यावहारिक क़ाबिलियतें ज़्यादा निखरकर सामने आती हैं।
हक़ीक़त यह है कि दुनिया का सिस्टम ईश्वर ने जिस तरह बनाया है, वह यही है कि यहाँ दबाव से ही विकास होता है। मुश्किलों की पाठशाला में इंसान की बेहतरीन तर्बियत होती है। असुरक्षित हालात के अंदर ही कर्तव्यनिष्ठा और मेहनत जागती है।
इतिहास बताता है कि उन्हीं लोगों ने बड़ी-बड़ी तरक़्क़ी हासिल की है, जो हालात के दबाव में थे। क़ुदरत का यही क़ानून इंसानों के लिए भी है और यही क़ानून सभी क़ौमों के लिए भी।
