सड़क की सीख
शहर की व्यस्त सड़कों पर हमेशा एक्सीडेंट का ख़तरा बना रहता है, इसीलिए ट्रैफ़िक को नियंत्रित करने के लिए सड़कों पर कई निर्देश लिखे होते हैं। इनमें से एक निर्देश यह है—
“अपनी लेन में चलना सुरक्षित चलना है।”
यानी अगर कोई इंसान अपनी लेन का पाबंद रहकर गाड़ी चलाए, तो वह ख़ुद को एक्सीडेंट से बचा सकता है। वह इस ख़तरे से सुरक्षित रह सकता है कि उसकी गाड़ी दूसरी गाड़ियों से टकराए और वह अपनी मंज़िल पर पहुँचने के बजाय क़ब्रिस्तान पहुँच जाए।
लंदन के एक ड्राइवर ने एक बार एक लेख लिखा था। उसमें उसने ट्रैफ़िक के कई नियम बताए थे। उसने अपने ज्ञान और तजुर्बे की रोशनी में बहुत ही अजीबो-ग़रीब बातें लिखी थीं। मिसाल के तौर पर, उसने लिखा—
“मान लीजिए कि आप सड़क पर गाड़ी चला रहे हैं कि अचानक एक साइड की गली से एक बॉल सड़क पर आ लुढ़कती है। इस बॉल को देखकर आपको समझ जाना चाहिए कि उसके पीछे एक बच्चा भी आ रहा होगा। अगर आपने सिर्फ़ ‘बॉल’ देखी और बच्चे को नहीं देखा, तो आप एक अच्छे ड्राइवर नहीं हैं। एक अच्छा ड्राइवर वही है, जो बॉल को देखते ही बच्चे को भी भाँप ले, भले ही उस वक़्त बच्चा उसे दिखाई न दे रहा हो। अगर ड्राइवर ने बॉल देखकर भी अपनी गाड़ी के ब्रेक नहीं लगाए, तो यक़ीनन अगले ही पल उसकी गाड़ी एक बच्चे को कुचल चुकी होगी।”
सड़क पर किया जाने वाला यह सफ़र ज़िंदगी के सफ़र के लिए एक शिक्षक है। इंसान चाहे तो सड़क के सफ़र से वह सब कुछ सीख सकता है, जो उसे ज़िंदगी के बड़े सफ़र के लिए ज़रूरी है।
अपनी गतिविधियों को हमेशा अपने ही दायरे में सीमित रखिए। अगर आपने दूसरे के दायरे में दख़ल-अंदाज़ी की, तो फ़ौरन ही उससे आपका टकराव शुरू हो जाएगा। इसका नतीजा यह होगा कि आपका चलता हुआ सफ़र रुक जाएगा। सामूहिक ज़िंदगी में जब बाहर से कोई संकेत नज़र आए, तो यह जानने की कोशिश कीजिए कि इस संकेत के पीछे और क्या-क्या बातें हैं, जो मौजूद तो हैं, मगर वक़्त रहते दिखाई नहीं दे रही हैं। अगर आपने सिर्फ़ दिखाई देने वाली चीज़ों को देखा और जो चीज़ें दिखाई नहीं दे रही हैं, उनसे बेख़बर रहे, तो इस मुक़ाबले वाली दुनिया में आप कभी भी कोई बड़ी कामयाबी हासिल नहीं कर सकते।
