इतिहास बनाना
बी. टक़मैन (B. Tuchman) ने कहा था कि इतिहास ग़लत अंदाज़ों का ख़ुलासा है—
इतिहास ग़लतफ़हमियों का सिलसिला है।
इसका मतलब यह है कि लोग मौजूदा हालात के आधार पर इतिहास के बारे में एक राय बना लेते हैं, मगर जब वर्तमान भविष्य बनता है, तो पता चलता है कि लोगों के अंदाज़े बिलकुल ग़लत थे। ज़्यादातर मामलों में भविष्य उस तरह से नहीं खुलता, जैसा कि शुरू में समझने वालों ने सोचा था। मिसाल के तौर पर 1945 में जब अमेरिका के जंगी जहाज़ हवा में गरजते हुए जापान पर परमाणु बम गिराने के लिए रवाना हुए, तो अमेरिका का अंदाज़ा यही था कि वह जापान को हमेशा के लिए राख का ढेर बना रहा है, मगर बाद के सालों ने बताया कि इस बाहरी हार में जीत का एक बड़ा भविष्य छुपा हुआ था।
इस घटना के 40 साल बाद लोगों ने देखा कि जापान दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक ताक़त बनकर उभर आया है।
इससे पता चलता है कि इंसानी इतिहास को बनाने वाला ख़ुद इंसान नहीं है—असल में यह ईश्वर है, जो इंसानी इतिहास को अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ कोई एक या दूसरी शक्ल देता है।
इतिहास की इस समझ में उन लोगों के लिए दिलासा है, जिनके बारे में मान लिया गया है कि वे बुझ चुके हैं या उन्हें मिटा दिया गया है, क्योंकि घटनाएँ बताती हैं कि इस दुनिया में बाहरी तौर पर बुझी हुई राख से चिंगारियाँ निकल आती हैं। यहाँ एक मिटी हुई चीज़ दोबारा ज़िंदा और ताक़तवर बनकर ज़मीन पर खड़ी हो जाती है। यहाँ बाहरी तौर पर एक ख़त्म हुई ताक़त (spent force) दोबारा नई जान पाकर ताक़तवर बन जाती है।
बाहरी हालात से कभी निराश मत होना। यह पूरी तरह मुमकिन है कि इतिहास जब अगला पन्ना पलटे, तो ऐसा नतीजा सामने आए, जो बाहरी हालात से बिलकुल अलग हो।
