कामयाबी के लिए
एक बिज़नेसमैन से पूछा गया—“कामयाबी क्या है?” उसने जवाब दिया—“जब तुम सुबह उठो, बिस्तर से कूदकर बाहर आओ और चिल्लाओ—वाह! एक और दिन! तब तुम कामयाब हो।”
असल में, रात के बाद एक नई सुबह का आना सबसे बड़ी चीज़ है, क्योंकि यह हमारे लिए काम करने का एक और दिन देता है। जिस इंसान के अंदर सच में काम का जज़्बा होगा, वह ऐसे दिन को पाकर ख़ुशी से उछल पड़ेगा और जो इंसान काम के दिन को पाकर ख़ुश हो उठे, वही इस दुनिया में कुछ बड़ा कर सकता है।
धरती पर रात और दिन का बारी-बारी से आना पूरी जानी-मानी क़ायनात में एक अनोखी बात है, क्योंकि बड़ी-से-बड़ी क़ायनात में या तो सूरज जैसे तारे हैं, जो आग के बहुत बड़े गोले की तरह हैं और उन पर इंसान जैसी ज़िंदगी मुमकिन नहीं है। उसके बाद जो ग्रह या उपग्रह हैं, जैसे मंगल (Mars) या चाँद, उनका घूमना धरती के उलट सिर्फ़ एकतरफ़ा है यानी वे सिर्फ़ अपनी ऑर्बिट में घूमते हैं। इसका नतीजा यह है कि उनके एक हिस्से पर हमेशा रात रहती है और दूसरे हिस्से पर हमेशा दिन।
धरती एक ख़ास ग्रह है, जो अपनी ऑर्बिट के साथ-साथ अपने एक्सिस पर भी घूमती है। इसी वजह से यहाँ रात और दिन बारी-बारी से आते रहते हैं। यह ईश्वर का ग़ज़ब का इंतज़ाम है। इस तरह ईश्वर ने इंसान को यह मौक़ा दिया है कि वह दिन के समय काम करे और रात को अपनी थकान मिटाए।
अगर कोई आदमी इस पूरे सिस्टम पर ग़ौर करे, तो धरती पर रात के बाद दिन का आना उसे इतना अजीब और ख़ास लगेगा कि सुबह होते ही वह सच में बिस्तर से कूदकर खड़ा हो जाएगा और ईश्वर का शुक्रिया अदा करेगा कि उसने उसे काम करने का क़ीमती मौक़ा दिया। जो लोग सुबह को एक क़ीमती नेमत समझते हैं, वही लोग अपनी सुबह को एक नए मौक़े की तरह इस्तेमाल करने में कामयाब हो सकते हैं।
