दूसरों का ख़्याल
सी. बेल रॉजर्स पोल्ट्री (मुर्ग़ी-पालन) के दुनियाभर में मशहूर एक्सपर्ट हैं। मुर्ग़ी-पालन पर उनकी एक मशहूर किताब है। यह किताब इन शब्दों से शुरू होती है—
बड़े पैमाने पर कामयाब मुर्ग़ी-पालन काफ़ी हद तक इंसान के स्वभाव की बात है। कोई शख़्स, जो चिड़ियों और जानवरों के लिए प्यार की भावना नहीं रखता, वह इस काम में कामयाब नहीं हो सकता। मुर्ग़ी-पालन के लिए एक सख़्त और परेशान कर देने वाले रूटीन काम की बहुत ज़रूरत है। यह काम उन लोगों को बहुत उबाऊ लगेगा, जो रोज़ एक ही काम करने के आदी नहीं हैं और वह भी इस उम्मीद के बिना कि कभी कोई छुट्टी या रुकावट का दिन आएगा।
“कामयाबी ठंडे दिमाग़ से लिये गए फ़ैसलों का मामला है, बिना दिमाग़ को बार-बार बदले, गहरी नज़र से देखने की क्षमता, पहल करने की क़ुव्वत और छोटी-छोटी बहुत सारी बातों पर लगातार और बिना रुके ध्यान देने का।”
ए.सी. कैंपबेल रॉजर्स,
प्रॉफ़िटेबल पोल्ट्री कीपिंग इन इंडिया एंड द ईस्ट,
डी.बी. तारापोरेवाला संस एंड कंपनी, बॉम्बे 1959, पेज 223
पोल्ट्री एक्सपर्ट ने मुर्ग़ी-पालन के बारे में जो बात कही है, वही आम ज़िंदगी के लिए भी सही है। जिस तरह मुर्ग़ियाँ पालने वाला इंसान सिर्फ़ अपनी मर्ज़ी से नहीं चलता, बल्कि मुर्ग़ियों की आदतों और ज़रूरतों का ख़्याल रखता है। ठीक उसी तरह ज़िंदगी में हमें दूसरे इंसानों के स्वभाव और उनके फ़ायदे की रियायत (allowance) देनी होती है।
दूसरों की इज़्ज़त करके ही हम दूसरों के बीच इज़्ज़त पा सकते हैं। दूसरों के काम आकर ही हम दूसरों को अपने काम ला सकते हैं। इस दुनिया में ख़ुद की कामयाबी असल में दूसरों की कामयाबी में मददगार बनने का दूसरा नाम है। जो लोग सिर्फ़ अपने बारे में जानते हैं और दूसरों को नहीं जानते, वे इस दुनिया में कभी कामयाब नहीं हो सकते।
