इंसानों की छुपी हुई ताक़तों को ज़िंदगी भर पढ़ने के बाद एक महान मनोवैज्ञानिक अल्फ्रेड एडलर ने कहा कि इंसान की सबसे ग़ज़ब की ख़ूबी है— ‘ना’ को ‘हाँ’ में बदल देना।
ईश्वर ने इंसान को बेहद ख़ास क़ाबिलियतों के साथ बनाया है। एक मनोवैज्ञानिक के ये शब्द उसी सच्चाई को मानते हैं। इस क़ाबिलियत की सीमा यह है कि इंसान अँधेरे में भी रोशनी की एक किरण देख सकता है। वह बुरे हालात को अच्छे हालात में बदल सकता है।
जब उसके पैरों तले ज़मीन खिसक जाती है, तो भी वह अपने लिए एक नया मैदान ढूँढ लेता है और उसमें मेहनत करके दोबारा अपनी मंज़िल तक पहुँच जाता है।
यह किताब इंसानी ज़िंदगी के इसी पहलू के बारे में है। यह नामुमकिन में मुमकिन को ढूँढने की एक कोशिश है। यह निराशा में आशा जगाने का एक संदेश है और शायद आज के इंसान को इसकी पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरत है।
