विपरीत परिस्थितियाँ
सर वॉल्टर स्कॉट (1771-1832) को अंग्रेज़ी साहित्य में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है, लेकिन उनकी इस साहित्यिक महानता के साथ उस क़ीमत को भी समझना आवश्यक है, जो उन्होंने अपने साधारण जीवन में चुकाई। उनकी साधारण ज़िंदगी ने उन्हें हालात का ऐसा शिकार बनाया कि उन्हें अपनी पहचान के लिए ज़बरदस्त जद्दोजहद करनी पड़ी।
जीवन के आरंभिक वर्षों में वॉल्टर स्कॉट को असाधारण प्रतिभा का व्यक्ति नहीं माना जाता था। 30 वर्ष की आयु तक उनका जीवन किसी महान कवि या लेखक जैसा नहीं था। हालात ने उन्हें व्यापारिक ज़िम्मेदारियों का बोझ उठाने के लिए मजबूर कर दिया। हालाँकि उनकी शुरुआती कविताओं ने उन्हें थोड़ा-बहुत वित्तीय सहारा तो दिया, लेकिन इसी सहारे के दम पर उन्होंने कुछ कारोबारी जोखिम उठा लिये।
वक़्त ने ऐसी करवट ली कि उनके हालात बद से बदतर हो गए। इन कड़े इम्तिहानों ने उनकी शख़्सियत को जड़ से झकझोरकर रख दिया, लेकिन कहते हैं न कि ‘मुसीबत इंसान को तराशती है’; इन मुश्किलों ने वॉल्टर स्कॉट को अंदर से पूरी तरह बदल दिया और उनके ज़हन को मेहनत के एक नए और विशाल मैदान की ओर मोड़ दिया। यहीं से उनके जीवन का दूसरा निर्णायक अध्याय आरंभ होता है। उन्होंने शौर्य और प्रेम से भरी ऐतिहासिक कथाएँ लिखनी शुरू कीं। उन्होंने इतिहास को उपन्यास की शैली में ढालते हुए प्रेम-कथाओं की रचना की।
कारोबार में मिले झटकों ने उन्हें इस रास्ते पर धकेल दिया था। अगले क़रीब 35 सालों तक उन्होंने अपनी पूरी तवज्जोह और ताक़त इसी काम में झोंक दी। उस दौर में उनकी रचनाओं की बाज़ार में बहुत ऊँची क़ीमत मिलना मुमकिन नहीं था, लेकिन उनकी रचनाओं में ऐसा आकर्षण था कि प्रकाशकों का ध्यान स्वाभाविक रूप से उनकी ओर खिंचता चला गया।
आख़िरकार वॉल्टर स्कॉट की बेमिसाल लगन और मेहनत ही उनकी कामयाबी की गारंटी बनी। उनकी किताबें खूब बिकीं और उन्होंने अपना पाई-पाई क़र्ज़ उतार दिया। सच तो यह है कि अगर उन पर मुसीबतों का पहाड़ न टूटा होता, तो शायद उनके भीतर छिपा वह ‘लेखक’ कभी बाहर न आता, जिसने उन्हें अंग्रेज़ी साहित्य में एक असाधारण मुक़ाम दिलाया।
उनकी इसी साहित्यिक सेवा के लिए उन्हें ‘सर’ की उपाधि से सम्मानित किया गया। मज़े की बात यह है कि वॉल्टर स्कॉट कभी ख़ुद को साहित्य के ऊँचे दर्जे का दावेदार नहीं मानते थे। वे न तो किसी प्रतिष्ठित अकादमिक पद पर थे, न ही किसी साहित्यिक सत्ता के केंद्र में, लेकिन उनकी सादगी और संघर्ष ने ही उन्हें वह महान ‘सर वॉल्टर स्कॉट’ बना दिया, जिसे आज सारी दुनिया जानती है।
