दुनिया का नियम
गाय दूध देती है। यह तो हर कोई जानता है, लेकिन बहुत कम लोग हैं, जो यह सोचते हों कि गाय दूध कैसे देती है। गाय दूध जैसी चीज़ देने के क़ाबिल तभी बनती है, जब वह घास को दूध में बदल सके। गाय जब इस अनोखी क़ाबिलियत का सबूत देती है कि वह एक छोटी चीज़ को बेहतर चीज़ में बदल सकती है, तभी यह मुमकिन होता है कि वह ईश्वर की दुनिया में दूध जैसी क़ीमती चीज़ देने वाली बने।
यही हाल पेड़ का है। पेड़ से इंसान को अनाज, सब्ज़ी और फल मिलते हैं, लेकिन ऐसा कब होता है? ऐसा तभी होता है, जब पेड़ अपनी क़ाबिलियत साबित करे कि उसमें मिट्टी और पानी डाला जाए और वह उसे बदलकर अनाज, सब्ज़ी और फल के रूप में बाहर निकाले। एक छोटी चीज़ पेड़ के अंदर जाती है और वह उसे अपने अंदरूनी सिस्टम से बदल देता है और उसे एक बेहतर चीज़ के रूप में बाहर लाता है।
यही मामला इंसानी ज़िंदगी का भी है। ज़िंदगी भी इसी तरह की एक परीक्षा है। इस दुनिया में इंसान के साथ भी यही होता है कि उसे कमियों का सामना करना पड़ता है। उसके सामने नापसंद हालात आते हैं। यहाँ फिर से इंसान की कामयाबी यह है कि वह अपने बुरे हालात को अच्छे हालात में बदल सके। वह अपनी नाकामियों के अंदर से कामयाबी का रास्ता निकाल ले।
यही दुनिया का नियम है। यह इंसान और जानवर दोनों पर लागू होता है। जो कोई भी इस ख़ास क़ाबिलियत को साबित करे, वही इस दुनिया में कामयाब है और जो इस क़ाबिलियत को साबित करने में नाकाम रहे, वह ईश्वर की इस दुनिया में अपने आपको नाकामी से नहीं बचा सकता।
ईश्वर की गाय यानी ईश्वर की मर्ज़ी का ऐलान। वह बताती है कि इस दुनिया में ईश्वर हमसे क्या चाहता है। ईश्वर हमसे यह चाहता है कि हमारे अंदर ‘घास’ जाए और वह ‘दूध’ बनकर बाहर निकले। लोग हमारे साथ बुराई करें, तब भी हम उनके साथ भलाई करें। हमारे साथ बुरे हालात पेश आएँ, तब भी हम उन्हें अच्छे हालात में बदल सकें।
