मौक़े का इस्तेमाल
अमेरिका में एक बार कुछ बहुत सफल बिज़नेसमैन पर एक स्टडी हुई, जो कामयाबी की सीढ़ी पर बहुत ऊपर पहुँचे। उनकी इस कामयाबी की वजह के बारे में कई बातें कही गईं... जैसे—बहुत ज़्यादा मेहनत, काम का इतना जुनून कि बीवी-बच्चे, छुट्टी, मौज-मस्ती सब पीछे रह जाएँ वग़ैरह-वग़ैरह। वैसे असल में उनकी कामयाबी की सबसे अहम वजह एक रिसर्चर (Reader’s Digest, May 1982) के मुताबिक़ यह है कि ऐसे लोग मौक़ों को पहचानने के उस्ताद होते हैं। अपने फ़ायदे का कोई भी मौक़ा आते ही वे उसे फ़ौरन इस्तेमाल करते हैं, देर नहीं करते।
सीधी बात यह है कि बड़ी कामयाबी सही वक़्त पर मौक़े का फ़ायदा उठाने का ही दूसरा नाम है। चाहे जान-बूझकर हो या अचानक, इंसान को हमेशा, हर फ़ील्ड में चौकन्ना रहना चाहिए और जैसे ही कोई अच्छा मौक़ा मिले, उसे तुरंत इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि मौक़ा हमेशा ज़िंदगी में एक ही बार आता है, दोबारा नहीं आता। जिसने एक बार मौक़ा गँवा दिया, समझो उसने उसे हमेशा के लिए खो दिया।
नए मौक़े बिलकुल छिपे हुए नहीं होते, बहुत-से लोगों को उनका अंदाज़ा हो जाता है, लेकिन आगे बढ़कर उन्हें इस्तेमाल करने वाले हमेशा बहुत कम होते हैं। इसकी वजह यह है कि नए मौक़े को इस्तेमाल करने में हमेशा कुछ जोखिम (risk) भी होता है। इसका नतीजा भविष्य में मिलने वाला है, इसलिए इसमें उम्मीद भी होती है और डर भी। जो लोग आलस करते हैं या बस सोचते ही रह जाते हैं, वे पीछे रह जाते हैं। इसके उलट जो लोग चौकन्ने होते हैं और जोखिम उठाकर आगे बढ़ जाते हैं, वही कामयाब होते हैं।
संभावनाओं को पहचानो। जब भी कोई मौक़ा मिले, उसे फ़ौरन इस्तेमाल करो। तुम ज़रूर बड़ी कामयाबी हासिल करोगे।
