समझदार कौन है?
डेल कार्नेगी (Dale Carnegie) ने कहा कि ज़िंदगी में सबसे ज़रूरी चीज़ यह नहीं है कि आप अपनी कामयाबियों से फ़ायदा उठाएँ। कोई भी बेवक़ूफ़ ऐसा कर सकता है। असल में सबसे अहम बात यह है कि आप अपने नुक़सानों से भी फ़ायदा उठाना सीखें। इसके लिए अक़्ल की ज़रूरत होती है और यही चीज़ एक समझदार और एक बेवक़ूफ़ में फ़र्क़ करती है—
“ज़िंदगी में सबसे ज़रूरी चीज़ अपनी जीत का फ़ायदा उठाना नहीं है—कोई भी मूर्ख यह कर सकता है। असली महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपने नुक़सानों से भी लाभ कमाएँ। इसके लिए बुद्धिमानी चाहिए और यही बात एक समझदार इंसान और एक बेवक़ूफ़ में अंतर करती है।”
इस दुनिया में ऐसा बहुत कम होता है कि कोई इंसान सिर्फ़ कामयाबियों से घिरा हो और उसके पास बस यही काम बचा हो कि वह उनसे लगातार फ़ायदा उठाता रहे। ज़्यादातर हालात में ऐसा होता है कि इंसान ख़ुद को मुश्किलों और नुक़सानों के बीच पाता है और उसे इन मुश्किलों और नुक़सानों से गुज़रते हुए ही अपनी मंज़िल तक पहुँचना पड़ता है।
इस दुनिया में सिर्फ़ वही लोग कामयाब होते हैं, जो यह साबित करते हैं कि वे बुरे हालात की शिकायत करने के बजाय उन्हें स्वीकार करना जानते हैं। जो मुश्किलों के ख़िलाफ़ रोने-धोने के बजाय उन्हें हल करने की कोशिश करते हैं।
“नुक़सान से फ़ायदा उठाना”—यही वह एकमात्र ख़ूबी है, जो इस दुनिया में किसी को भी कामयाब बनाती है। चाहे कोई इंसान हो या कोई देश दोनों को इसी एक इम्तिहान से गुज़रना पड़ता है। इस दुनिया में कामयाब वह नहीं है, जिसके सामने कभी मुश्किलें नहीं आतीं। कामयाब वही है, जो मुश्किलों के बावजूद कामयाब हो सके। मंज़िल पर वही पहुँचता है, जो रास्ते की तकलीफ़ों के बावजूद अपना सफ़र जारी रख सके।
