तखरीब (विनाश) नहीं
कोरियन एयर की फ्लाइट संख्या 858 बग़दाद से 29 नवम्बर 1987 को उड़ी। इसे सियोल पहुँचना था। यह अंडमान सागर के ऊपर 37 हज़ार फीट की ऊँचाई पर उड़ रही थी कि अचानक धमाका हुआ और इसके 115 यात्री हवा में ही मारे गए । धमाका इतना तेज था कि पायलट एयरपोर्ट को संकट- संकेत भी नहीं भेज सका, जबकि इसके लिए केवल एक सेकण्ड का समय पर्याप्त था। विमान के विनाश की यह साज़िश उत्तर कोरिया की तरफ़ से रची गई थी। योजना के तहत उत्तर कोरिया की एक 24 साल की महिला को प्रशिक्षित कराकर विमान पर भेजा गया। वह बगदाद से विमान पर सवार हुई और विमान के ऊपर के डिब्बे में टाइम बम रखकर अबू धाबी में उतर गई। यह एक शक्तिशाली टाइम बम था। यह निर्धारित समय पर फटा और पूरा विमान अचानक नष्ट हो गया।
इस योजना का उद्देश्य 1988 के ओलम्पिक को असफल करना था जो दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में हो रहा था। उत्तर कोरिया की साम्यवादी सरकार को दक्षिण कोरिया का यह गौरव अखरता था। उत्तर कोरिया के तानाशाह किम इल सुंग ने अपनी गुप्त एजेंसी को आदेश दिया कि वे दक्षिण कोरिया के विमान को बम से उड़ा दें ताकि लोगों को वहाँ की यात्रा असुरक्षित लगे और वे ओलम्पिक में भाग लेने का विचार छोड़ दें। इस विनाशकारी उद्देश्य के तहत उस विमान को नष्ट कर दिया गया।
दक्षिण कोरियाई विमान को नष्ट करना बहुत ही घृणित अपराध था। मगर यह आतंकवादी कार्रवाई पूरी तरह विफल साबित हुई। किसी भी देश ने इससे डरकर ओलम्पिक में भाग लेना बंद नहीं किया। इसके विपरीत, 161 देशों ने घोषणा की कि वे इसमें भाग लेंगे, जो किसी भी पूर्व ओलम्पिक मुक़ाबले में भाग लेने वालों की संख्या से अधिक है।
The destruction of KAL 858 was a monstrous crime, but as an act of terrorism it proved to be monumental failure. No country was frightened away from the Olympics. On the country,161 countries have announced they will attend, more than at any previous Games. (Reader’s Digest, August 1988)
किसी के खिलाफ़ विनाश करना दरअसल अपने ही ख़िलाफ़ विनाश करना है। ऐसा व्यक्ति केवल अपना नुक़सान करता है; वह किसी और को वास्तविक रूप से नुक़सान नहीं पहुँचाता।
