सफलता का राज़
एक पश्चिमी विचारक का कथन है:
“That which does not kill me makes me stronger.”
(जो चीज़ मुझे नहीं मारती, वह मुझे और भी मज़बूत बना देती है)
जब इंसान किसी बड़ी मुश्किल का सामना करे और हिम्मत न हारे, बल्कि सोच-विचार के ज़रिए उसका हल निकाले, तो वह अपने अंदर एक नई ताकत पैदा कर लेता है। उसने अपने भीतर वह क्षमता जगा ली, जिससे वह मुश्किल हालात का सामना कर सके और रुकावटों के बावजूद आगे बढ़ता रहे। मुश्किलें नासमझ इंसान को तबाह कर देती हैं, लेकिन समझदार इंसान के लिए यही मुश्किलें तरक्की की सीढ़ी बन जाती हैं।
ज़िंदगी में सफल होने के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज़ “उच्च विचारधारा” है। हमें उन सवालों से ऊपर उठना चाहिए जो अतीत या गुज़रे हुए दुखों पर आधारित होते हैं।
“मेरे साथ ऐसा क्यों हुआ?” इस सवाल के बजाय इंसान को उन बातों पर सोचना चाहिए जो भविष्य के रास्ते खोलने वाले हों—“अब जब यह पेश आचुका है, मुझे इसके लिए क्या करना चाहिए”:
“We need to get over the questions that focus on the past and on the pain—Why did this happen to me?—and ask the question that opens doors to the future. Now that this has happened, what shall I do about it?’’
(Rabbi Harold Kushner, When Bad Things Happen to Good People)
यह दुनिया ऐसी बनी है कि यहां अप्रिय घटनाएं अक्सर होती हैं। इंसान बार-बार मुश्किलों में घिरता है। ऐसी स्थिति में सफल जीवन का केवल एक ही राज़ है—अतीत को भुलाकर भविष्य के बारे में सोचना। वह खोए हुए अवसरों पर अफसोस करने के बजाय, अपनी पूरी ऊर्जा उन संभावनाओं पर लगाए जो अभी भी उसके पास मौजूद हैं, जो अब तक नष्ट नहीं हुई हैं—वर्तमान को स्वीकार करना इंसान के लिए भविष्य के दरवाजे खोलता है। और वर्तमान को न मानने से इंसान न केवल वर्तमान खो देता है, बल्कि आने वाले भविष्य से भी वंचित हो जाता है।
