हक़ीकत-पसंदी की तरफ़
निकीता ख्रुश्चेव 1958 से 1964 तक सोवियत रूस के प्रधानमंत्री थे। उन्होंने पूँजीवादी दुनिया को संबोधित करते हुए अपना मशहूर वाक्य (हिंदुस्तान टाइम्स, 28 जून 1988) कहा था कि हम तुम्हें दफ़न कर देंगे:
We will bury you.
इसी तरह अमेरिका के राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने 1983 में सोवियत रूस को “शैतानी साम्राज्य” (the evil empire) कहा था। अमेरिकी अधिकारियों का कहना था कि हम साम्यवादी रूस को समुद्र में धकेल देंगे। लेकिन साम्यवादी क्रांति के सत्तर साल बाद, 1988 में अंततः दोनों देशों को अपनी सोच बदलनी पड़ी। रूस के नेता बातचीत के लिए अमेरिका जाने लगे। रोनाल्ड रीगन ने खुद मॉस्को का दौरा किया (28 जून से 2 जुलाई 1988), जिसे वे पहले असंभव मानते थे। दौरे से पहले वाशिंगटन में (हिंदुस्तान टाइम्स, 26 मई 1988) उन्होंने कहा कि मॉस्को के साथ अमेरिका का संबंध हक़ीकत-पसंदी के आधार पर होना चाहिए:
U.S. relations with Moscow must be guided by realism.
चालीस साल से दोनों देशों के बीच हथियारों की दौड़ (arms race) चल रही थी। दोनों एक-दूसरे को तबाह करने के लिए इतिहास के सबसे ख़तरनाक हथियार बनाने में लगे हुए थे। लेकिन आज वे अपने बनाए हुए हथियारों पर खुद ही पाबंदी लगा रहे हैं, बल्कि उन्हें नष्ट भी कर रहे हैं। टाइम्स ऑफ़ इंडिया (3 अगस्त 1988), सेक्शन 2, पेज 1 पर एक ख़बर है जिसकी हेडलाइन यह है:
USSR destroys 4 missiles
(सोवियत रूस अपने चार मिसाइलों को नष्ट करता है) ।
ख़बर में बताया गया है कि 2 अगस्त 1988 को सोवियत रूस ने सर्योज़ेक (Saryozek) में चार छोटी रेंज के मिसाइल (OTR-22) नष्ट कर दिए। यह घटना कई देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुई, जिनमें भारत और अमेरिका के प्रतिनिधि भी शामिल थे। मिसाइलों को खत्म करने का यह काम उस समझौते के तहत किया गया है जो रीगन और गोर्बाचेव के बीच हुआ है।
समझौते के तहत सोवियत रूस अगले तीन साल में अपने 1752 मिसाइलों को नष्ट करेगा, जिनकी रेंज 500 किलोमीटर से लेकर 5500 किलोमीटर तक है। अमेरिका, समझौते के अनुसार, अपने इसी प्रकार के 859 मिसाइलों को नष्ट करेगा।
रूस और अमेरिका की नीति में इस नाटकीय बदलाव का राज़ यह है कि हथियार बनाने और सैन्य श्रेष्ठता हासिल करने की कोशिश में दोनों देशों की तरक़्क़ी रुक गई। एक-दूसरे के खिलाफ हथियारों की दौड़ (arms race) और एक-दूसरे के खिलाफ आरोप लगाने वाली (blame-oriented) नीति में आधी सदी गुजारने के बाद उन्हें यह समझ में आया कि इस नकारात्मक तरीके से वे किसी भी तरह का कोई फ़ायदा नहीं उठा सके। बल्कि एक-दूसरे की काट करने की कोशिश में दोनों ने खुद अपने आप को तबाही के किनारे पर पहुँचा दिया। इसलिए अब उन्होंने पुरानी नीति को छोड़कर हल-रुखी (solution-oriented) नीति अपनाने का फैसला किया है।
