सफलता का रहस्य
डॉ. सी. वी. रमन (Sir Chandrasekhara Venkata Raman, 1888-1970) भारत के महानतम वैज्ञानिकों में से एक हैं। 1930 में उन्हें भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला। वे विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले एशियाई थे। इसके बाद वे विश्व भर में प्रसिद्ध हो गए। उनकी वैज्ञानिक खोज “रमन प्रभाव (Raman Effect)” आज विज्ञान के स्थापित सिद्धांतों में मानी जाती है।
रमन का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ। उनके पिता मात्र दस रुपये महीने की तनख्वाह पर स्कूल शिक्षक थे। उन्होंने कठिन हालात में अपनी असाधारण मेहनत से विज्ञान के क्षेत्र में ऊंचा स्थान प्राप्त किया। उन्होंने अपनी सफलता की यात्रा को इन शब्दों में व्यक्त किया:
“A long history of frustration, disappointment, struggle and every kind of tribulation.”
(एक लंबा इतिहास असफलता, निराशा, संघर्ष और हर तरह की कठिनाइयों का।)
एक व्यक्ति ने रमन की वैज्ञानिक सफलता को कम आंकने की कोशिश करते हुए कहा कि वे अपनी खोज तक सिर्फ “संयोग” से पहुंचे हैं, जैसे कई अन्य वैज्ञानिक भी संयोग से अपनी खोज करते हैं। यह सुनकर रमन ने गंभीरता से कहा:
“The idea that a scientific discovery can be made by accident is ruled out by the fact that the accident, if it is one, never occurs except to the right man.”
(यह विचार कि वैज्ञानिक खोज संयोग से की जा सकती है, इस तथ्य की वजह से गलत है कि संयोग, अगर होता भी है, तो केवल सही व्यक्ति के साथ ही होता है।)
डॉ. रमन ने अपनी ज़िंदगी की आखिरी खोज का सार इन शब्दों में बयान किया:
“The right man, right thinking, right instruments, and right results.”
(सही व्यक्ति, सही सोच, सही उपकरण, और सही परिणाम।)
