योग्यता के अनुसार लाभ
काबा ज़मीन पर ख़ुदा की निशानियों में से एक निशानी है। अल्लाह तआला ने तारीख़ी तौर पर यहाँ ऐसे सामान मुहय्या किए हैं कि जो शख़्स वहाँ जाए वह असर लिए बिना न रहे। यह वह मक़ाम है जहाँ भटकी हुई इंसानी रूहों को ख़ुदा की गोद मिल जाती है। वहाँ पत्थराए हुए सीनों में बंदगी के चश्मे जारी किए जाते हैं। वहाँ बेनूर आँखों को ख़ुदा की तजल्ली (रौशनी) दिखायी जाती है। इसी के साथ इस दुनिया में “फ़ैज़ बक़द्र-ए-इस्तिदाद” (योग्यता के एतेबार से लाभ) का उसूल जारी है। अल्लाह के घर का फ़ैज़ (लाभ) उसी को मिलता है जो अपने अन्दर सलाहियत लेकर वहाँ जाए। बे-सलाहियत लोगों के लिए हज का सफ़र बस एक क़िस्म का सैर-सपाटा है। वे वहाँ जाते हैं ताकि जैसे गए थे वैसे ही दोबारा वापस चले आएँ।
