ग़ौर करने की बातें

एक रिवायत है कि रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने फ़रमाया, “हाजी अल्लाह की निगरानी में रहता है, हज पर जाते वक़्त भी और हज से लौटने के बाद भी।” (अल-फ़िरदौस बिमासूरिल-ख़िताब, हदीस संख्या 2761)।

हाजी के बारे में यह बात किसी पुरअस्रार माना (रहस्यमय अर्थ) में नहीं है, बल्कि एक मालूम नफ़्सियाती (मनोवैज्ञानिक) माना में है। हज के साथ अल्लाह तआला ने ऐसे ख़ास मामले रखे हैं कि जैसे ही कोई उसको करता है, उसके अंदर अल्लाह की याद आने लगती है और उसकी ओर ख़ास झुकाव पैदा हो जाता है। जैसे किसी शख़्स को न्यूयॉर्क की यात्रा करनी हो, तो “न्यूयॉर्क” से मुतअल्लिक़ उसकी मानसिकता बनने लगती है, और लौटने के बाद भी उस पर “न्यूयॉर्क” का असर छाया रहता है। इसी तरह जो शख़्स हज का सफ़र करता है, वह वहां जाने से पहले और वहां से लौटने के बाद अपने अंदर एक ख़ास क़िस्म की रब्बानी नफ़्सियात (मानसिकता) महसूस करता है।

लेकिन हज का यह फ़ायदा कोई मशीनी अंदाज़ का नहीं है, जो अपने आप हर हाजी को मिल जाए। इसके लिए ज़रूरी है कि हाजी के अंदर उसके मुताबिक़ सलाहियत मौजूद हो। इस तरह के सभी फ़ायदे हमेशा आदमी की अपनी सलाहियत की बुनियाद पर होते हैं। अगर सलाहियत मौजूद हो तो फ़ायदा मिलेगा, और सलाहियत न हो तो फ़ायदों के चश्मों (स्रोतों) के दरमियान रहते हुए भी आदमी फ़ायदे से महरूम रह जाएगा।

हज़रत अनस बिन मालिक की एक रिवायत इन लफ़्ज़ों में आई है:

“लोगों पर एक ऐसा समय आएगा जब मेरी उम्मत के अमीर लोग सैर-सपाटे के लिए हज करेंगे, बीच के लोग तिजारत के लिए हज करेंगे, उनके पढ़े-लिखे लोग दिखावे और नाम के लिए हज करेंगे, और ग़रीब लोग भीख मांगने के लिए हज करेंगे।” (तारीख़ बग़दाद, हदीस संख्या 5386)।

हज़रत अनस की यह रिवायत बहुत डरा देने वाली है। इस की रोशनी में मौजूदा ज़माना के मुसलमानों को ख़ास तौर पर अपना एहतिसाब (introspection) करना चाहिए। उन्हें ग़ौर करना चाहिए कि उनका हज इस रिवायत का प्रमाण तो नहीं बन गया है। मालदार हज़रात सोचें कि उनके हज में तक़वा की रूह है या सैर व तफ़रीह की रूह। आम लोग यह सोचें कि वह दीनी फ़ायदे के लिए हज करने जाते हैं या तिजारती फ़ायदे के लिए। उलमा ग़ौर करें कि वह बंदगी का सबक़ लेने के लिए बैतुल्लाह जाते हैं या लोगों में अपनी झूटी दीनी फ़ज़ीलत क़ायम करने के लिए। इसी तरह ग़रीब लोग सोचें कि हज को उन्होंने ख़ुदा से माँगने का ज़रिया बनाया है या इंसानों से माँगने का ज़रिया।

Maulana Wahiduddin Khan
Share icon

Subscribe

CPS shares spiritual wisdom to connect people to their Creator to learn the art of life management and rationally find answers to questions pertaining to life and its purpose. Subscribe to our newsletters.

Stay informed - subscribe to our newsletter.
The subscriber's email address.

leafDaily Dose of Wisdom

Ask, Learn, Grow

Your spiritual companion