रसूलुल्लाह (सल्ल०) का हज
हज की इबादत का निज़ाम हज़रत इब्राहीम और हज़रत इस्माईल ने क़ायम किया था। इसके बाद हालांकि इस निज़ाम में कई तरह के बिगाड़ आ गए, फिर भी इसका रिवाज लगातार बाक़ी रहा। रसूलुल्लाह (सल्ल०) जब मक्का में पैदा हुए, उस वक़्त हज में जाहिली रस्मों के मिल जाने के बावजूद वह पूरी तरह जारी था।
हिजरत के बाद रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने सिर्फ़ एक बार हज अदा किया, जिसे आम तौर पर हज्जतुल विदा कहा जाता है।
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