एक सबक़
हज्जतुल विदा को रसूलुल्लाह (सल्ल०) ने जिस अंदाज़ में अदा किया, उसमें हमारे लिए कई अहम सबक छिपे हुए हैं। उनमें से एक यह है कि सामूहिक ज़िंदगी अक्सर रिवायतों (परंपराओं) के सहारे चलती है। इन्हें अचानक तोड़ देना ऐसे नुकसान का कारण बन सकता है, जिसकी भरपाई आसान नहीं होती। इसलिए सामूहिक जीवन में जो भी काम किया जाए, वह रिवायतों का ख्याल रखते हुए किया जाए। रिवायतों को तोड़कर काम करना पैग़म्बरी तरीक़े के मुताबिक़ नहीं है।
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