हज क्या है
हज इस्लाम का एक अहम स्तंभ है। दूसरी इबादतों की तरह इसका भी असली मकसद तक़वा (परहेज़गारी) है, लेकिन इसकी एक खास बात यह भी है कि यह अबुल-अंबिया हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की ज़िंदगी से जुड़ा हुआ है।
हज का मकसद यह है कि अल्लाह का जो बंदा हज के मक़ामात तक पहुंच सकता है, वह अपनी जिंदगी में कम से कम एक बार जरूर वहां पहुंचे। वहां अलग-अलग आमाल के जरिए वह अपनी पूरी बंदगी का सबूत दे। वह इब्राहीमी सरज़मीन पर पहुंचकर अलामती (प्रतीकात्मक) तौर पर उनके आमाल को दोहराए और इस तरह अपने जाहिर और बातिन को इब्राहीमी रंग में रंगने का जज़्बा पैदा करे।
