एक बेहतर भविष्य की ओर
यह एक उच्च शिक्षित मुस्लिम व्यक्ति की कहानी है। उन्होंने एक विश्वविद्यालय से प्रथम श्रेणी की डिग्री प्राप्त की और इसके बाद उन्हें एक अच्छी नौकरी मिली। वे इस नौकरी से खुश थे, लेकिन कुछ समय बाद उनके और उनके बॉस के बीच मतभेद हो गया। मतभेद इतना बढ़ गया कि उन्हें अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी। इसके बाद मेरी उनसे मुलाकात हुई। वे बहुत निराश और चिंतित थे। मैंने उन्हें समझाया और फिर उनकी डायरी में ये शब्द लिख दिए:
"कभी-कभी माली एक पेड़ को एक स्थान से उखाड़ता है, केवल इसलिए ताकि वह उस पेड़ को एक बेहतर स्थान पर लगा सके, जहाँ वह अधिक फल-फूल सके" (4 अक्टूबर, 1981)।
इस सलाह के बाद उन्होंने अपनी कोशिश जारी रखी, और अंततः वे पहले से भी अधिक सफल हो गए।
यह प्रकृति का एक नियम है। यह नियम हर चौबीस घंटे में खामोश भाषा में इंसान को बताया जाता है। हर कोई जानता है कि हमारी दुनिया में हर शाम के बाद फिर से सुबह होती है। हर रात के बाद फिर से दिन का उजाला फैल जाता है। यह प्रकृति की खामोश भाषा है, जो हमें बताती है कि इस दुनिया में असफलता हमेशा एक अस्थायी घटना होती है। इस दुनिया में हर असफलता के बाद सफलता का एक नया अवसर आता है, बशर्ते व्यक्ति धैर्यपूर्वक उसका इंतज़ार करे।
इंतज़ार का अर्थ निष्क्रिय बने रहना नहीं है। इसका मतलब है कि इंसान अपनी कोशिशों को लगातार जारी रखे। वह हर असफलता को अस्थायी माने और भविष्य के प्रति अपनी आशा को कभी समाप्त न होने दे। वह बीती बातों में उलझने के बजाय आगे की दिशा में बढ़ता रहे। भावनाओं में बहकर निर्णय लेने से बचे और यथार्थ पर आधारित योजनाओं को अपनाए। जीवन में यह हमेशा आवश्यक होता है कि व्यक्ति अपने अनुभवों के आधार पर अपने मामले का नए सिरे से आकलन करे और नई सोच के साथ आगे की योजना बनाए। यही बेहतर भविष्य की ओर बढ़ने का एकमात्र प्रभावी मार्ग है।
