फुल स्टॉप नहीं
तारीख़ में बे-शुमार ऐसी मिसालें मिलती हैं, जबकि एक मर्द या औरत को कोई हादसा पेश आया हो और इस हादसे ने उसे बज़ाहिर माज़ूर (disabled) बना दिया हो, लेकिन इस इंसान ने अपनी ज़िंदगी की री-प्लानिंग की और अपने अमल से यह साबित किया कि अगरचे बज़ाहिर वह एक माज़ूर इंसान है, लेकिन वह एक और पहलू से पूरी तरह ‘डिफरेंटली एबल्ड इंसान’ (differently abled person) है। इस हक़ीकत को मारूफ़ साइंटिस्ट स्टीफन हॉकिंग (1942-2018) की मिसाल से हम समझ सकते हैं। वाक़या यह है कि इस दुनिया में इंसान का सफ़र कभी रुकता नहीं। अगर उसकी पहली प्लानिंग नतीजा-ख़े़ज़ साबित न हो, तो वह दूसरी प्लानिंग (re-planning) के ज़रिए अपने आपको कामयाब बना सकता है, बशर्ते वह हर रुकावट के बाद अपने सफ़र को अज़ सर-ए-नौ जारी रखने का आर्ट जान ले।
