फ्रीडम और सरेंडर के दरमियान
क़ुरआन की एक आयत इन अलफ़ाज़ में आई है—
وَلَقَدْ ذَرَأْنَا لِجَهَنَّمَ كَثِيرًا مِنَ الْجِنِّ وَالْإِنْسِ لَهُمْ قُلُوبٌ لَا يَفْقَهُونَ بِهَا وَلَهُمْ أَعْيُنٌ لَا يُبْصِرُونَ بِهَا وَلَهُمْ آذَانٌ لَا يَسْمَعُونَ بِهَا أُولَئِكَ كَالْأَنْعَامِ بَلْ هُمْ أَضَلُّ أُولَئِكَ هُمُ الْغَافِلُونَ.
“और हमने जिन्नात और इंसान में से बहुतों को दोज़ख़ के लिए पैदा किया है। उनके दिल हैं, जिनसे वे समझते नहीं; उनकी आँखें हैं, जिनसे वे देखते नहीं; उनके कान हैं, जिनसे वे सुनते नहीं। वे ऐसे हैं, जैसे चौपाए, बल्कि उनसे भी ज़्यादा बे-राह। यही लोग हैं ग़ाफ़िल।” (क़ुरआन, 7:179)
इस आयत में ग़ौर करने से मालूम होता है कि अल्लाह ने इंसान को एक ख़ास मख़्लूक़ के तौर पर पैदा किया। इंसान एक ऐसी मखलूक़ है, जिसका कमाल यह है कि वह टोटल फ्रीडम के बावजूद टोटल सरेंडर का सबूत दे। जो आज़ादी के बावजूद अपनी आज़ादी पर मुकम्मल कंट्रोल करते हुए उसका इस्तेमाल करे। यही वे लोग हैं, जो कामयाब हुए और उन्हें जन्नत में दाख़िला मिलेगा। वे जन्नत के वारिस होंगे। इसके बरअक्स जिन लोगों ने अपनी आज़ादी का ग़लत इस्तेमाल किया, वे इम्तिहान में फ़ेल हो गए। उनके लिए आख़िरत की मेयारी दुनिया में कोई हिस्सा नहीं।
यह वे लोग हैं, जिनके लिए अल्लाह ने हिदायत का रास्ता खोला, मगर वे दर्ज-ए-ज़ैल आयत का मिस्दाक़ बन गए—
الَّذِي آتَيْنَاهُ آيَاتِنَا فَانْسَلَخَ مِنْهَا فَأَتْبَعَهُ الشَّيْطَانُ فَكَانَ مِنَ الْغَاوِينَ۔ وَلَوْ شِئْنَا لَرَفَعْنَاهُ بِهَا وَلَكِنَّهُ أَخْلَدَ إِلَى الْأَرْضِ وَاتَّبَعَ هَوَاهُ فَمَثَلُهُ كَمَثَلِ الْكَلْبِ إِنْ تَحْمِلْ عَلَيْهِ يَلْهَثْ أَوْ تَتْرُكْهُ يَلْهَثْ ذَلِكَ مَثَلُ الْقَوْمِ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا.
“जिसे हमने अपनी आयतें दी थीं, तो वह उनसे निकल भागा। फिर शैतान उसके पीछे लग गया और वह गुमराहों में से हो गया और अगर हम चाहते, तो उसे उन आयतों के ज़रिए बुलंदी अता करते, लेकिन वह तो ज़मीन का हो गया और अपनी ख़्वाहिशों की पैरवी करने लगा। पस उसकी मिसाल कुत्ते जैसी है कि अगर तू उसपर बोझ लादे, तब भी वह हाँफे और अगर उसे छोड़ दे, तब भी वह हाँफे। यह मिसाल उन लोगों की है, जिन्होंने हमारी निशानियों को झुठलाया।” (क़ुरआन, 76-7:175)
