मौत का सबक
मौत हर इंसान पर अचानक आती है। इस बिना पर इंसान मजबूर है कि मौत के मामले में ग़ैर यक़ीनी हालत में जिए। यह ग़ैर यक़ीनी हालत सिर्फ़ मौत के बारे में नहीं है, बल्कि ज़िंदगी के हर पहलू से मुताल्लिक़ है। इंसान को चाहिए कि वो फ़ितरत के इस क़ानून को क़बूल करे, और उसके मुताबिक़ अपनी ज़िंदगी की प्लैनिंग करे। वरना वह अपने आप को ऐसे नुक़सान से बचा नहीं सकता, जिसकी भरपाई कभी मुमकिन न हो।
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