एक सवाल

सवाल: أَكُفَّارُكُمْ خَيْرٌ مِنْ أُولَئِكُمْ أَمْ لَكُمْ بَرَاءَةٌ فِي الزُّبُرِ”—यानी, क्या तुम्हारे मुनकिर उन लोगों से बेहतर हैं या तुम्हारे लिए आसमानी किताबों में माफ़ी लिख दी गई है (54:4)? इसमें किस चीज़ के बरी होने की तरफ़ इशारा है। (हाफ़िज़ सैयद इक़बाल अहमद उमरी, तामिल नाडु)

जवाब: क़ुरआन की इस आयत में वक़्ती रेफ़रेंस के एतिबार से क़दीम मक्का के क़ुरैश को ख़िताब करते हुए यह बात कही गई है। मगर अबदी उसूल के एतिबार से इस आयत का मतलब यह है कि इस दुनिया में कोई गिरोह मुस्तसना (exception) गिरोह की हैसियत नहीं रखता। हर एक का मामला यकसाँ है। यानी हर एक को एक ही मयार पर जाँचा जाएगा। हर एक से एक ही उसूल की रोशनी में मामला किया जाएगा। न पैदाइशी एतिबार से किसी का मामला दूसरों से मुख़्तलिफ़ है, और न ऐसा है कि क़ुरआन के सिवा जो दूसरी आसमानी किताबें अल्लाह ने उतारी हैं, उनमें किसी गिरोह के बारे में यह ऐलान है कि उनका केस एक मुस्तसना केस है। वह भी ख़ुदा के हिसाब-किताब के क़ानून के तहत हैं, जिस तरह दूसरे तमाम लोग हैं।

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