एक आदर्श नमूना
इस्लामी शिक्षाओं के लिए एक आदर्श नमूना आयशा बिन्त अबू बक्र सिद्दीक़ का है। वे पैग़म्बरे इस्लाम (सल्ल०) की पत्नी थीं। वे पैग़म्बरे इस्लाम (सल्ल०) के देहांत के बाद लगभग पचास साल तक ज़िंदा रहीं, और पैग़म्बरे इस्लाम के बाद लंबी अवधि तक लोगों को इस्लाम की गहरी समझ-भरा संदेश पहुँचाती रहीं। वे रिकॉर्डिंग के ज़माने से पहले पैग़म्बरे इस्लाम की ज़िंदा रिकॉर्डिंग बनी रहीं। उनकी इस्लामी मारिफ़त इतनी बढ़ी हुई थी कि असहाब-ए-रसूल उनसे इल्म-ए-दीन सीखने के लिए दूर-दूर से आते थे।
हज़रत आयशा की ज़िंदगी तमाम महिलाओं के लिए एक उच्च नमूने की हैसियत रखती है। हज़रत आयशा ने अत्यंत सादा जीवन अपनाया। आर्थिक और भौतिक मामलों में उन्होंने आख़िरी हद तक संतोष का रास्ता अपनाया। इस तरह उन्हें यह अवसर मिला कि वे पैग़म्बरे इस्लाम (सल्ल०) की संगति से पूरा लाभ उठा सकें।
हज़रत आयशा ने अपना जीवन पैग़म्बरे इस्लाम से दीन का ज्ञान प्राप्त करने के लिए समर्पित कर दिया। इसी कारण उनको यह अवसर मिला कि वे पैग़म्बरे इस्लाम के निधन के बाद लंबे समय तक लोगों के लिए दीन की शिक्षिका और मार्गदर्शक बनी रहीं।
यही अवसर सभी महिलाओं के लिए खुला है। यदि वे सादा जीवन अपनाएँ और दीन का ज्ञान प्राप्त करने के लिए स्वयं को समर्पित कर दें, तो उन्हें भी अल्लाह की सहायता मिलेगी। इस प्रकार वे भी लोगों के लिए रहमत और भलाई का माध्यम बन सकती हैं, जिस तरह हज़रत आयशा अपने समय में बनी थीं।
(अल-रिसाला, फ़रवरी 2008)
